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अशर्फी लाल के दोहे

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रचयिता : Asharfi Lal Mishra


                                                                अशर्फी लाल मिश्र  1-  नीति के दोहे[1]  काला धन , दल बदल  2- दोहे[1] संत , राजनेता ,शिक्षक  3-  नीति के दोहे[1] प्रतिष्ठा , भ्रष्टाचार
4- नीति के दोहे[1] कर्म , संकट
5- नीति के दोहे[1]  प्रेम , पीड़ा
6- दोहे (प्रकृति वर्णन )[1]
7- नीति के दोहे[1] संतान , लोक सेवक
8- नीति के दोहे[1]  संत , विश्वास
9- नीति के दोहे[1]  प्रेम ,सत्य
10- दोहे (मुक्तक)[1] झूला , संपर्क
11- नीति के दोहे  विचार , नीति
12- नीति के दोहे[1] साधु, मित्र
13- नीति के दोहे[1] लक्ष्य , मित्र
14- दोहे कश्मीर विलय[1]
15- नीति के दोहे[1] समाज सेवा , मीडिया
16- नीति के दोहे  व्यवसाय, भ्रष्टाचार



श्रेष्ठ हिंदी निबंध - अशर्फी लाल मिश्र

काव्य संग्रह - अशर्फी लाल मिश्र

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रचयिता :  अशर्फी लाल मिश्र


                    अशर्फी लाल मिश्र               

1- खीर की कटोरी[1] 2- वर्षा गीत[1] 3- मीराबाई[1] 4- भक्ति गीत[1] 5- मेरे बलमा के नखरे बड़े बड़े[1] 6- हेमंत ऋतु. 7-शबरी: एक साध्वी[2] 8-ऋतुराज बसंत[1] 9- कुहासा का कर्फ्यू[1][2] 10- उषा सुन्दरी[1] 11- अमीरी का परदा [1]
12-होली की मस्ती[1]
13- राजपथ[1]
14- महाप्रयाण[1]
15-लिव इन रिलेशन[1]
16-सीनियर सिटीजन
17-निडर होकर बढ़ाओ कदम[1]
18-बिन बोले ही अँखियाँ बात करेेें[1]
19-जेठ दुपहरी की देख तपन[1]
20- मेरी कहानी[1][2]
21- महाप्रयाण का आमंत्रण (मुक्तक)[1]
22-अश्रुधारा (मुक्तक)[1][2]
23- सीता का अदम्य साहस (मुक्तक)[1][2]
24- जटायु का शौर्य मुक्तक[1][2]
25- कुछ मोती[1][2]
26- नीति के दोहे (मुक्तक )[1][2]
27- दोहे[1] मुक्तक
28- नीति के दोहे मुक्तक[1]
29- नीति के दोहे मुक्तक
30- नीति के दोहे मुक्तक
31- दोहे (प्रकृति वर्णन )
32- नीति के दोहे (मुक्तक )
33- नीति के दोहे (मुक्तक)
34- दोहे (मुक्तक)
35- नीति के दोहे (मुक्तक)
36- नीति के दोहे (मुक्तक)
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मेरे स्मरणीय प्रसंग - अशर्फी लाल मिश्र

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लेखक - अशर्फी लाल मिश्र



अशर्फी लाल मिश्र
1-जीवन के स्मरणीय प्रसंग- भाग 1
2-जीवन के स्मरणीय प्रसंग-भाग 2
3-जीवन के स्मरणीय प्रसंग: भाग 3

4-जीवन के स्मरणीय प्रसंग -भाग 4

5-जीवन के स्मरणीय प्रसंग- भाग 5
6-जीवन के स्मरणीय प्रसंग- भाग 6

7-जीवन के स्मरणीय प्रसंग - भाग 7

8-जीवन के स्मरणीय प्रसंग -भाग 8

9-जीवन के स्मरणीय प्रसंग -भाग 9

10-जीवन के स्मरणीय प्रसंग- भाग 10

11-जीवन के स्मरणीय प्रसंग: भाग 11

12-जीवन के स्मरणीय प्रसंग -भाग 12

13-जीवन के स्मरणीय प्रसंग: भाग 13

14-जीवन के स्मरणीय प्रसंग - भाग 14

15-जीवन के स्मरणीय प्रसंग, भाग 15

16-जीवन के स्मरणीय प्रसंग, भाग-16

17-जीवन के स्मरणीय प्रसंग - भाग 17

18-जीवन के स्मरणीय प्रसंग - भाग 18

19-जीवन के स्मरणीय प्रसंग - भाग 19

20-जीवन के स्मरणीय प्रसंग - भाग 20

21-जीवन के स्मरणीय प्रसंग - भाग 21

22-जीवन के स्मरणीय प्रसंग - भाग 22

23-जीवन के स्मरणीय प्रसंग - भाग 23

24-जीवन के स्मरणीय प्रसंग - भाग 24

25-वृन्दावन की तीर्थयात्रा (यात्रा कथा )-1

26-वृन्दावन की तीर्थयात्रा (यात्रा कथा )-2

27-वृन्दावन की तीर्थयात्रा (यात्रा कथा)-3

28-70वां गणतंत्र द…

ब्रजभाषा के कृष्ण-काव्य में माधुर्य-भक्ति के कवि

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                                              An  e-book free of cost

By: अशर्फी लाल मिश्र

* निम्बार्क सम्प्रदाय 

1.श्रीभट्ट
2.हरिव्यासदेव
3.रूपरसिक


* गौड़ीय सम्प्रदाय 

1.गदाधर भट्ट
2. सूरदास मदनमोहन
3. माधुरीदास
4. वल्लभ रसिक

* राधावल्लभ सम्प्रदाय

1.गोस्वामी हितहरिवंश
2. सेवक ( दामोदरदास )
3. हरिराम व्यास
4. ध्रुवदास
5. नेही नागरीदास

* हरिदासी सम्प्रदाय

1. स्वामी हरिदास
2. विट्ठलविपुल देव
3. बिहारिनदेव
4. नागरीदास
5. सरसदास

* वल्लभ सम्प्रदाय 

1. नन्ददास 
2. चतुर्भुजदास
3. गोविन्दस्वामी
4. छीतस्वामी 
5. गंगाबाई


* अन्य कवि 

1. मीराबाई
2.सूरदास
3. परमानन्ददास
4. कुम्भनदास 
5. रसखान
6. कृष्ण्दास


Creator : Asharfi Lal Mishra


                                                             Asharfi Lal Mishra

e-Valmiki Ramayana ( Sanskrit text with translation in English ) : Yuddhakanda (9)

By: Asharfi Lal Miashra
|| THE RAMAYANA ||
(Condensed)

*Yuddhakanda*

                                                                **Poet : Valmiki**

continue from page-8

अवाप्तं   धर्मचरणं  यशश्च  विपुलं त्वया। 
                                                    रामं शुश्रूषता भक्त्या वैदेह्या सह सीतया।।


" Through devoted service to Rama , the privilege of practising dharma and ever increasing fame have been obtained by you as well as by Sita , daughter of the king of the Videhas."


स तथोक्ता महाबाहुर्लक्ष्मणं प्राञ्जलिं स्थितम। 
                                                  उवाच   राजा   धर्मात्मा   वैदेहीं   वचनं शुभम।।


Speaking thus to Lakshmana who stood near with folded hands , the righteous-minded king said these auspicious words to Vaidehi :


                                                 कर्तव्यो न तु वैदेहि मन्युस्त्यागमिमं प्रति। 
                                                 रामेण   त्वद्विशुद्धयर्थं  कृतमेतद्धितैषिणा।।


O Vaidehi , you should not entertain any ange…

e-Valmiki Ramayana ( Sanskrit text with translation in English ) : Yuddhakanda (8)

By : Asharfi Lal Mishra

|| THE RAMAYANA ||
(Condensed)
                                                                    *Yuddhakanda*
[Poet:Valmiki]
continue from page-7
तद्गच्छ ह्यभ्यनुज्ञाता यथेष्टं जनकात्मजे। 
                                                   एता  दश  दिशो  भद्रे कार्यमस्ति न मे त्वया।।


Therefore ,O daughter of Janaka , with my permission go where you like ; all about you are the ten cardinal points . O amiable one ,you are of no use me any more .


कः पुमान हि कुले जातः स्त्रियं परगृहोषिताम। 
                                                 तेजस्वी    पुनराद्यात    सुहृल्लेख्येन  चेतसा।।


For,which man of a good family and a bright reputation will take back with eager heart a wife that has lived in another's house ?


रावणाङकपरिभ्रष्टां   दृष्टां  दुष्टेन  चक्षुषा। 
                                                 कथं त्वां पुनरादद्यां कुलं व्यपदिशन्महत।।


How can I , claiming noble descent , take back you who have been disgraced by remaining on Ravana's lap and who hav…